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चोर पक्षी महालत (हिन्दी) - Roofus Treepie Bird

महालत पक्षी संपूर्ण भारतवर्ष में पाया जाता है|इस पक्षी का स्थानीय नाम टकाचोर भी है... जो बहुत विचार पूर्वक रखा गया है...| महालत महोदय को चोरी में महारत हासिल है... जैसे ही छोटे बड़े पक्षी सुबह अपने घर से निकलते हैं दाना पानी प्रवास के लिए यह उनके घर में सेंधमारी कर देता है... भोजन छीन लेता है.. चुरा लेता है.... भोजन को छुपाने में भी माहिर है| आखिर यह कौवे के परिवार से जो आता है...| जो आदत कौवे की है वहीं इसकी है... या यूं कहे कौवे से भी बढ़कर है | खाने में सर्वाहारी है |वेज नॉनवेज सब कुछ हजम है... एकदम ताजा मरे हुए पशु का मांस बहुत प्रिय है इसको| यह पक्षी मीठी करकस भयानक अनेक तरीका की आवाज निकालने में माहिर है... पूरा दिन इसका ताका झांकी में ही जाता है.... आम के पेड़ व विशाल वृक्षों पर घोंसला बनाता है चटाई युक्त... इसका घोसला गहरा नहीं होता टू डाइमेंशनल होता है बेतरतीब| नर और मादा पक्षी को आप दोनों हाथ में लेकर भी नहीं पहचान सकते दोनों एकदम हूबहू होते हैं * This article was originally published here

वायरस

वायरस ग्रीक भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है विष के सूक्ष्म अणु... जो सृष्टि की उत्पत्ति के दौरान से ही महासागरों के गहरे अंधेरे जल में... गंगा यमुना नील अमेज़न रिवर टेम्स नदी के पानी में बह रहे हैं...पूरी पृथ्वी पर इनकी एक महीन चादर बिछी हुई है ...प्रकृति में प्रति सेकंड अरबों खरबों वायरस उत्पन्न होते हैं नष्ट होते रहते हैं.. समुंदर के 1 लीटर पानी में ही 5000 टाइप के वायरस पाए जाते हैं अभी तक केवल 1% वायरस के विषय में अध्ययन किया सका है | वायरस ईश्वर निर्मित रचना है क्योंकि इनकी उत्पत्ति भी पृथ्वी पर जीवन के साथ ही हुई वायरस के अंदर भी वही जीवन का रसायन है जो हम मनुष्य जीवधारी ओ की कोशिकाओं में भरा होता है जिसे आप विज्ञान की भाषा में कोई भी नाम दे दे आरएनए या डीएनए| ईश्वर बिना प्रयोजन रचना नहीं रचता उसका सार्थक उद्देश्य होता है... इसे समझने के लिए वायरस या विषाणु से अलग हटकर थोड़ी चर्चा बैक्टीरिया जीवाणु पर कर लेते हैं बैक्टीरिया वायरस की तरह निर्जीव नहीं है वह एक कोशिकीय जीव है जो अपने आप प्रजनन करते हैं भोजन बनाते हैं नष्ट हो जाते हैं... बैक्टीरिया वायरस से स्थूल मोटे हो

संसार का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति एंगस मैकेस्किल (हिन्दी)

बात आज से थोड़ी पुरानी है आज से लगभग सवा सौ साल पहले स्कॉटलैंड में एक अत्यंत शक्तिशाली युवा हुआ था जिसका नाम था एंगस मेकेस्किल।उसका जन्म हुआ था 1825 में और 1863 में उसकी मृत्यु हो गई यानी सिर्फ 38 वर्ष की आयू में। उसकी लंबाई थी 7 फुट 9 इंच और वजन था 193 किलोग्राम ।एंगस के कुल 12 भाई-बहन थे और सब के सब सामान्य शरीर वाले थे बचपन में उसके शरीर में भी कोई विशेष बात नहीं थी लेकिन जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती गई उसके भीतर असाधारण शक्ति आती चली गई और एक बार उसने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया जब उसकी उम्र महज 14 साल थी और उसने एक इतना बड़ा लट्ठा जिसे उठाने के लिए कम से कम 10 लोग लगते उसने उस लट्ठे को अकेले उठाकर आरा मशीन तक पहुंचा कर उसे काट भी डाला था और 14 वर्ष की आयु के पश्चात उसकी आकार में वृद्धि होने लगी और 19 साल का होते होते उसकी लंबाई 7 फुट 9 इंच हो गई इतना तीर का और ताकतवर होने के बावजूद उसकी खुराक एक सामान्य व्यक्ति जितनी ही थी उसके बारे में एक मजेदार बात है कि उसके जूते इतने बड़े थे कि एक बार उसके जूतों में एक बिल्ली ने अपने बच्चे दे दी और 21 दिन तक वह बच्चे उसके जूते में ही रहे वह ज